📤 Share Image 💬 WhatsApp पर Share करें भक्ति ❝ “मन के हारे हार हैं, मन के जीते जीति। कहै कबीर हरि पाइए, मन ही की परतीति॥” — संत कबीर दास जी स्रोत: कबीर ग्रंथावली, पृष्ठ 194 ← सभी Quotes देखें
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ 🙏 श्री दुर्गा सप्तशती पूरा Quote पढ़ें →
हित सों हित, रति राम सों, रिपु सों बैर बिहाउ। उदासीन सब सों सरल, तुलसी सहज सुभाउ॥ सरल भावा... 🙏 गोस्वामी तुलसीदास जी पूरा Quote पढ़ें →